Mantra Sangrah (मंत्र संग्रह)

मंत्र संग्रह

वक्रतुण्ड गणेश मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्य समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥

 

शिव मूल मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

 

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

 

(या)

 

ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुवः स्वः

ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम्पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।

ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ

 

 रुद्र गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

 

लक्ष्मी बीज मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:

 

महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

 

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

 

कुबेर धन प्राप्ति मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥

 

कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥

 

श्री राम मंत्र

ॐ राम ॐ राम ॐ राम ।

ह्रीं राम ह्रीं राम ।

श्रीं राम श्रीं राम ।

रामाय नमः ।

रां रामाय नमः

श्री राम जय राम जय जय राम ।

श्री रामचन्द्राय नमः ।

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।

सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने।।

 

भगवान विष्णु मंत्र

ॐ नमोः नारायणाय. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय || शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम।

विश्वधारंगनसदृशम्मेघवर्णं शुभांगम। लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्याननगमयम।

वन्दे विष्णुम्भवभयहरं सर्व्वलोकैकनाथम।।

 

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

 

माँ सरस्वती आराधना

देवी सरस्वती को ज्ञान, साहित्य, कला और स्वर की देवी माना जाता है और
हर वर्ष वसंत पंचमी को देवी सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

सरस्वती मूल मंत्र-
ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
या
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

परीक्षा से पूर्व उक्त मंत्र का जाप करना चाहिए –
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।

स्मरण शक्ति हेतू उक्त मंत्र का जाप करना चाहिए-
ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।

उच्च शिक्षा हेतू उक्त मंत्र का जाप लाभकारी है-

शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।
श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

सरस्वती वंदना मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥

हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।

वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

कला और साहित्य के क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को उक्त मंत्र का पाठ लाभकारी है –

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धकारापाहां।
हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां।।

मां दुर्गा की आराधना

रोगमुक्ति के लिए मां दुर्गा की आराधना उक्त मंत्र के साथ करना चाहिए

जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।

सौभाग्य, आरोग्य और सुख की प्राप्ति हेतू मंत्र

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

सामाजिक कल्याण हेतू मां दुर्गा की आराधना उक्त मंत्र के साथ करनी चाहिए

देव्या यया ततमिदं जग्दात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या।
तामम्बिकामखिलदेव महर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः।।