Kalsarp Dosh (कालसर्प दोष)

कालसर्प दोष

राहू की स्थिति के अनुसार कालसर्प दोष बारह प्रकार के होते है लोगो में मान्यता है की कालसर्प दोष से नुकसान होता है । सत्य है, परन्तु संघर्ष उपरान्त सफलता भी निश्चित होती है हालाँकि उपायों के द्वारा प्रभाव काफी हद कम किया जा सकता है।

कालसर्प दोष/योग के प्रकार व उसके फल निम्नानुसार है-

अनंत कालसर्प योग- मिथ्यवाची, पत्नी से कलह, षडयंत्र एवं न्यायिक परेशानी।
प्रथम भाव में राहु और सप्तगम भाव में केतु हो तो अनंत काल सर्प योग बनता है।

कुलिक कालसर्प योग- धन हानि, क्लेश, उदर एवं आँख संबंधी रोग।
द्वितीय भाव में राहु और अष्टधम भाव में केतु हो तो यह कुलिक काल सर्प योग बनता है।

वासुकि कालसर्प योग- कैंसर, कान संबंधी परेशानी एवं भाई-बहनों के मध्य मतभेद।
राहु तृतीय और केतु भाग्य- भाव यानि नवे भाव में हो तो वासुकि काल सर्प योग बनता है।

शंखपाल कालसर्प योग- व्यापर में नुकसान, आलस्य, बुजुर्गो को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी एवं गृह कलेश।
चतुर्थ स्थाऔन पर राहु और यानि दशवे भाव में केतु दोनों हों तो शंखपाल काल सर्प योग बनता है।

पद्म कालसर्प योग- प्रयासों के विपरीत कार्य में हानि एवं संतान द्वारा कष्ट।
पांचवें स्थान पर राहु और ग्या रहवें भाव में केतु हो तो उस स्थिति में पद्म काल सर्प योग बनता है।

महापद्म कालसर्प योग- शत्रु से नुकसान, माता पक्ष से हानि एवं स्वास्थ्य में धन हानि।
छठे भाव में राहु और बहरवे भाव में केतु सहित सातों ग्रह हों तो महापद्म काल सर्प योग बनता है।

तक्षक कालसर्प योग- धन एवं स्वास्थ्य हानि एवं पत्नी का असहयोग के साथ ही गृह कलेश की स्थिति।
सातवे भाव में राहु और प्रथम भाव में केतु हो तो तक्षक काल सर्प योग बनता है।

कर्कोटक कालसर्प योग- गृह कलेश, धन संचय में परेशानी, सही निर्णय के आभाव में खुद का नुकसान एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानी।
आठवे भाव में राहु और द्वितीय भाव में केतु हो तो कर्कोटक काल सर्प योग बनता है।

शंखचूड कालसर्प योग- उच्च वर्ग के लोगो से हानि, मस्तिष्क संबंधी रोग, दुर्भाग्य।
राहु चौथे पर हो और केतु दशवे में हो तो शंखनाद/शंखचूड काल सर्प योग बनता है।

पातक कालसर्प योग- पिता से मतभेद, हानि एवं गृह कलेश।
दशवे भाव में राहु और चतुर्थ भाव में केतु हो तो पातक कालसर्प योग बनता है।

विषाक्त कालसर्प योग- अवैध सम्बन्ध की आशंका, हानि एवं बड़े भाई से सहयोग का आभाव।
ग्याकरहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु सभी ग्रहों को समेटे हुए हो तो विषाक्तभ काल सर्प योग बनता है।

शेषनाग कालसर्प योग- चिकित्सा संबंधी अपव्यय, धन की कमी एवं अनावश्यक यात्रा कष्ट।
बारहवें भाव में राहु और छठे भाव में केतु के अंतर्गत सभी ग्रह विद्यमान हों तो शेषनाग काल सर्प योग बनता है।

कालसर्प दोष निवारण के अत्यंत सरल उपाय –

१. किसी भी सिद्ध ज्योतिर्लिंग या शिवालय जहाँ शमशान और जलाशय एक साथ हो, में जाकर कालसर्प दोष की विधिवत शांति।
२. नाग-पंचमी में नाग देवता की आराधना व पूजन करे।
३. कालसर्प दोष यंत्र की स्थापना व पूजन करे।
४. गरुण देवता की आराधना व पूजन करे।
५. नाग-नागिन जोड़े के समक्ष विधिवत स्थापना के उपरान्त “ॐ जूम सः “ मंत्र का जाप करे।
६. लगातार सात बुधवार को एकाक्षी नारियल का उतारा कर नदी में प्रवाहित करे।
७. नाग प्रतिमा की अंगूठी धारण करे।