महावीर जयंती (Mahaveer Jayanti)

चौबीस वें तीर्थंकर महावीर का जन्मदिन महावीर जयन्ती के रुप मे मनाया जाता है. महावीर का जन्म एक क्षत्रिय राजकुमार के रूप में लिच्छवी राज परिवार में चैत्र, शुक्लपक्ष, त्रयोदशी को बसोकुंड (वैशाली) नामक स्थान में हुआ था. इस वर्ष महावीर जयंती 19 अप्रैल 2016 को मनाई जाएगी.

महावीर जी ने कठोर तपस्या द्वारा कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया. कैवल्य ज्ञान से तात्पर्य “शंशय-रहित और स्थायी ज्ञान से है”. कैवल्य ज्ञान प्राप्ति के उपरान्त महावीर जी जैन धर्म की पुनर्स्थापना की. वर्तमान जैन धर्म की व्यापकता का श्रेय महावीर जी को जाता है.

महावीर जयंती के दिन महावीर जी की प्रतिमा का अभिषेक (सामान्यतः दूध और जल से) किया जाता है और इसके उपरान्त श्रद्धालु महावीर जी को जल, वस्त्र, सुगन्धित द्रव्य, पुष्प तथा फल अर्पित करते है. महावीर जी की प्रतिमा को सिंहासन या रथ पर बिठा कर यात्रा (जुलूस) निकालने की भी परम्परा है जिसमे बड़ी संख्या में जैन धर्मावलम्बी (श्रद्धालु) शामिल होते हैं.

महावीर स्वामी के वचन (साभार bhartdiscovery.org)-
• हमें हिंसा किसी भी रूप में नहीं करनी चाहिए।
• सदा सत्य बोलना चाहिए।
• निर्बल, निरीह और असहाय व्यक्तियों की ही नहीं बल्कि पशुओं को भी नहीं सताना चाहिए।
• मनुष्य को मन, वचन , कर्म से शुद्ध होना चाहिए।
• ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
• मनुष्य को अपने जीवन काल में देशाटन अवश्य करना चाहिए इससे ज्ञानार्जन होता हैं।
• चोरी कभी नहीं करनी चाहिए। चोरी भी मन,वचन एवम कर्म से होती हैं अथवा किसी एक से भी करना, महापाप हैं।

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